पारंपरिक शिल्प को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की तैयारी
जबलपुर। उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्शन योजना के संभागीय कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय महाकोशल महाविद्यालय जबलपुर में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता संभागीय नोडल अधिकारी प्रो. अरुण शुक्ल ने की। इसमें जबलपुर संभाग के जबलपुर, नरसिंहपुर, कटनी, डिंडौरी और मंडला जिलों के शासकीय महाविद्यालयों के लिए नवीन कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय आवश्यकताओं को देखते हुए विद्यार्थियों के कौशल विकास, रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ाना है। सभी जिलों के प्रस्तावों को अंतिम रूप देकर राज्य कार्यालय को भेज दिया गया है।
नवाचार और मशीनीकरण पर विशेष जोर
जबलपुर जिले के विभिन्न कॉलेजों के लिए कई आधुनिक मशीनों के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। शासकीय होमसाइंस कन्या महाविद्यालय के लिए मोमोज मेकिंग, रोटी मेकिंग, पेपर मेशे और कपड़ों पर एंब्रॉयडरी के लिए ऑटोमेटिक कंप्यूटराइज मशीन की मांग की गई है। इसी तरह शासकीय श्याम सुंदर अग्रवाल स्नातकोत्तर महाविद्यालय सिहोरा में 3 यूनिट हथकरघा संयंत्र और शासकीय बरेला महाविद्यालय में ब्यूटी पार्लर लैब स्थापित करने की योजना है। इन प्रयासों से छात्राओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
जिलों की क्षेत्रीय विशिष्टता के अनुसार प्रस्ताव
संभाग के अन्य जिलों में वहां की स्थानीय कला और संसाधनों के आधार पर केंद्र विकसित किए जाएंगे। नरसिंहपुर जिले में हस्तशिल्प और मूर्तिकला प्रशिक्षण पर ध्यान दिया जाएगा। डिंडौरी जिले के प्रधानमंत्री उत्कृष्टता संस्थान, शासकीय चंद्रविजय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में जनजातीय कला कौशल प्रयोगशाला बनाने का प्रस्ताव है। मंडला के रानी दुर्गावती शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में चावल निकालने की मशीन संयंत्र लगाने की तैयारी है। कटनी जिले के स्लीमनाबाद स्थित शासकीय महाविद्यालय में 1 हथकरघा संयंत्र और 1 कोकोपिट कम्पोस्ट यूनिट की स्थापना की जाएगी। बजट आवंटन प्राप्त होते ही इन परियोजनाओं पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
युवाओं के सर्वांगीण विकास पर चर्चा
इस बैठक में संभाग के सभी जिला नोडल अधिकारियों ने शिरकत की और अपने-अपने क्षेत्रों की कार्ययोजना प्रस्तुत की। इसमें जबलपुर की जिला नोडल अधिकारी डॉ. राजलक्ष्मी त्रिपाठी, कटनी की डॉ. चित्रा प्रभात, नरसिंहपुर के डॉ. बी.डी. कोष्ठी, मंडला के डॉ. सुदामा प्रसाद धूमकेती और डिंडौरी के डॉ. रवि सिंह शामिल रहे। सभी अधिकारियों ने अपने जिलों में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर विचार-विमर्श किया। स्थानीय उद्योगों की मांग के अनुसार युवाओं को तैयार करने के लिए इन प्रस्तावों को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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